ट्रूकॉलर, जिसकी शुरुआत 2009 में स्वीडन से हुई थी, आज भारत के 25 करोड़ से ज्यादा यूजर्स की जरूरत बन चुका है
अपनी क्राउडसोर्सिंग रणनीति और स्पैम कॉल्स से सुरक्षा के कारण यह ऐप भारत में जबरदस्त लोकप्रिय हुआ
लेकिन अब सरकार की नई पहल CNAP (Calling Name Presentation) इसके अस्तित्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण द्वारा पेश किया गया यह सिस्टम सीधे टेलीकॉम नेटवर्क और...
...KYC दस्तावेजों के आधार पर कॉल करने वाले की पहचान सुनिश्चित करेगा
CNAP की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी थर्ड-पार्टी ऐप को डाउनलोड करने या...
...डेटा एक्सेस की अनुमति देने की आवश्यकता नहीं होगी
यह व्यवस्था न केवल अधिक विश्वसनीय है, बल्कि ट्रूकॉलर के विज्ञापन और प्रीमियम मॉडल के लिए सीधा खतरा भी पैदा करती है
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कॉलर आईडी सुविधा के दम पर अब बाजार में टिके रहना मुश्किल होगा
इसलिए कंपनी को अपनी दिशा बदलनी पड़ सकती है
आने वाले समय में ट्रूकॉलर को AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और उन्नत डिजिटल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खुद को नए सिरे से ढालना होगा